WEP/IWSG February 2020- Café Terrace

The first WEP Challenge of 2020 is here. To read more about it, visit here And here is my take on the prompt which is a popular painting by Vincent Van Gogh, given here... Café Terrace Ah! The balmy mornings of late summer. How I love the sun on my back and on those wicker … Continue reading WEP/IWSG February 2020- Café Terrace

मैं इश्क़ हूँ

सच मे,तुम्हारी कसम,चाँद को हथेली पर रख सकता हूँमैं इश्क़ हूँकुछ भी कर सकता हूँ!तारों की बारातसजा सकता हूँबिंदु से तरंगेउठा सकता हूँमन को आतुरकर उसकी थाह लेता हूँमैं इश्क़ हूँइन्द्रजालों में पनाह लेता हूँ।मैंने आसमान को लाल भी रंगा हैपंखों के बिनाउड़ने का स्वाद भी चखा है,फीकी खिचड़ी को भोज बताया हैमैं इश्क़ हूँमैने … Continue reading मैं इश्क़ हूँ

तुम कहते हो दिसंबर खुदगर्ज़ है…

तुम कहते हो दिसंबर खुदगर्ज़ है दिन और साल, दोनो चुरा ले जाता है। इस बार फिर सर्दी की खटखटाहट सुन रही हूँ बांवरे दिसंबर की आहट सुन रही हूँ। देखी होगी तुमने भी उसकी खुदगर्ज़ी; सिहरन भरी रातों को सिगड़ी का साथी बना देता है कभी प्यार को शाल की तरह ओढ़ा देता है … Continue reading तुम कहते हो दिसंबर खुदगर्ज़ है…