IWSG 12/4/2019:Greetings from A Hundred Quills

This is my first post for the Insecure Writer's Support Group monthly blogging event. Before I move on to talk about myself, I would like to thank my friend Susan Rouchard, who introduced me to the Insecure Writer's Group and who has a wonderful blog that you can check here. So, here I go. I am a … Continue reading IWSG 12/4/2019:Greetings from A Hundred Quills

तुम कहते हो दिसंबर खुदगर्ज़ है…

तुम कहते हो दिसंबर खुदगर्ज़ है दिन और साल, दोनो चुरा ले जाता है। इस बार फिर सर्दी की खटखटाहट सुन रही हूँ बांवरे दिसंबर की आहट सुन रही हूँ। देखी होगी तुमने भी उसकी खुदगर्ज़ी; सिहरन भरी रातों को सिगड़ी का साथी बना देता है कभी प्यार को शाल की तरह ओढ़ा देता है … Continue reading तुम कहते हो दिसंबर खुदगर्ज़ है…

पतझड़

सुनहरा, लाल, भूरा खूबसूरती का यह रंग मुझे लगता है अधूरा। क्यों पत्तियाँ गिरा देते हैं पेड़ जर्जर होते जीवन को अब निर्जन भी बना देते हैं पेड़। अवसान जैसे खुद की ही बड़ाई करता हो मौत की अजीब सी नुमाइश करता हो। परिणति का यह कैसा है स्वरूप जो मन को कर देता है … Continue reading पतझड़

Politics and Tea

The scholarly commoners glibly discussed politics The course and recourse of History Their insights Several wrongs and a right! What shall become and who shall be They spoke at length over cups of tea. They lambasted statesmen and hailed democracy Chartered a plan for the warring parties to see. Some wrote prose and others poetry … Continue reading Politics and Tea

टी वी की याद में…

शिमला की गर्मियां गर्मियों जैसी होती ही कहाँ है। सूरज बेशक सर चढ़ के बोले, शाम की शीतल बयार पहाडों में होने का एहसास दिला ही देती है। ऐसे में 1984 की गर्मियों की एक शाम याद है। एक छोटी सी लड़की नीली हरी फ़्रॉक में अपने पापा के पीछे दौड़ रही थी। उसके पापा … Continue reading टी वी की याद में…

खोल दो…

खोल दो भींची हुई मुट्ठियाँ जकड़े हुए अचम्भों के दरवाज़े विस्मय पर लगे ताले। मान लो कि लोमड़ी और गीदड़ का ब्याह है और पहाड़ के पीछे इंद्रधनुष छिपा है। दिखाने दो दिल को उछाल पट पर कलाबाजियाँ सलीके से आखिर मिला क्या है। सहला लो थोड़ी सी बेपरवाहियाँ विवेक में भला ऐसा क्या है। … Continue reading खोल दो…