किताबों की नौकरी!

विनोद बाबु किताबों पर पड़ी धूल झाड़ रहे थे। तीस सालों से शिमला की स्टेट लाइब्रेरी में लाइब्रेरियन थे पर आज उनका यहां आखिरी दिन था। 'अगर एक महीने में आप एक भी मेंबर बना पाए तो हम लाइब्रेरी बंद नही करेंगे।' ऐसा कहा था डायरेक्टर साहब ने। पर इंटरनेट के ज़माने में किसे मेंबर … Continue reading किताबों की नौकरी!

Advertisements