क्यों दंभ हूँ मैं?

मैं तो एक कण हूँ विशाल समय का एक क्षण हूँ, धरातल पर बहता सा एक भ्रम हूँ, शायद मैं छल हूँ, बस आज हूँ नही कल हूँ मैं। मैं अथाह सागर की सिर्फ एक बूंद हूँ, रत्ती भर हूँ रेत मे, मिट्टी नही धूल हूँ, पर्वत की चट्टान नही ज़र्रे सी लुप्त हूँ, ब्रह्माण्ड … Continue reading क्यों दंभ हूँ मैं?

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