यादों का स्वेटर

(आज मेरे बेटे का जन्मदिन है। चौदह साल यूँ गुज़र गए मानो छू मंतर हो गए! उसके बचपन को याद करते हुए कुछ पंक्तियाँ लिखी हैं) लम्हों के ऊनी धागों सेमैंने यादों का स्वेटर सजोया हैवक़्त तो बेज़ार हैदेखो तेज़ रफ़्तार हैस्वेटर अब वो सिमट गया हैसमय से जैसे लिपट गया हैऊन अब भी नर्म … Continue reading यादों का स्वेटर

तो क्या मिल जाते हैं चुप रहने वाली औरतों को सौ सुख?

कहते हैं वो घर सुखी होते हैंजहां औरतें कम बोलती हैं,उनकी चुप्पी की बुनियादपर खड़े होते हैंखुशियों के शीश महल, भर जाती हैं उनकी झोलियाँहज़ारों सुखों से।एक चुप परवो कहते हैं नासौ सुख वारते हैं…और ताउम्र की चुप्पी पर? गुज़र जाती हैउनकी ज़िंदगीसिर्फ एक उसूल पर,वो जानती हैंबोलने के गुनाहों केमाफीनामे नही बनते। कटघरे बनते … Continue reading तो क्या मिल जाते हैं चुप रहने वाली औरतों को सौ सुख?