सपनों के शहर हम जाते नही

उड़ने का हौंसलाहम दिखाते नही,सपनों के शहरअब हम जाते नही। बहती हवाक्यों पेड़ों की शाखाओंसे उलझ गई,पानी की लहर देखोउफ़ान से पहलेही सिमट गई,उड़ती पतंग भीअपनी डोर से आके लिपट गई। पिंजरों से हमेंशिकायत है बड़ीफिर भी उड़ने का हौंसलाहम दिखाते नही,सपनों के शहरअब हम जाते नही। आसमानों की मुरादहमें कम तो नहीमगर पैरों को … Continue reading सपनों के शहर हम जाते नही

तो क्या मिल जाते हैं चुप रहने वाली औरतों को सौ सुख?

कहते हैं वो घर सुखी होते हैंजहां औरतें कम बोलती हैं,उनकी चुप्पी की बुनियादपर खड़े होते हैंखुशियों के शीश महल, भर जाती हैं उनकी झोलियाँहज़ारों सुखों से।एक चुप परवो कहते हैं नासौ सुख वारते हैं…और ताउम्र की चुप्पी पर? गुज़र जाती हैउनकी ज़िंदगीसिर्फ एक उसूल पर,वो जानती हैंबोलने के गुनाहों केमाफीनामे नही बनते। कटघरे बनते … Continue reading तो क्या मिल जाते हैं चुप रहने वाली औरतों को सौ सुख?

रहती है सिर्फ याद

रास्ते सफर बन जाते हैं ढूंढ लेते हैं नए सिरे अंत से पहले। बालों में उलझा हवा का झोंका झटक जाता है, समय की छलनी से मैं देखती हूँ पहाडों पर बिखरती धूप। मुट्ठी में भर लायी थी जो, उस सुबह की भीनी सुगंध को चुटकी भर सूंघ लेती हूँ। दर्पण सा साफ था नीले … Continue reading रहती है सिर्फ याद

आसमान का रंग

(Image source: pixabay) एक बार की बात है, एक आदमी बीमार पड़ गया तो उसे अस्पताल में भर्ती करवा दिया गया। वह पूरा दिन बिस्तर पर पड़ा रहता था। उसके कमरे में बस एक छोटा सा रोशनदान था, जिससे आसमान साफ नज़र आता था। मगर आकाश के एक टुकड़े के सिवा उसे कुछ न दिखाई … Continue reading आसमान का रंग

वो, तुम्हारे भीतर वाली दुनिया

वो तुम्हारे भीतर वाली दुनिया कभी शांत, स्थिर, मूक सी, आडंबर को ताकते हुए निस्तब्ध रहकर सिद्धी पाती है। कभी अचानक... उपद्रवी सी होकर हंगामा मचाती है। धरातल खंगर सा लगे पर भीतर अश्रु बहाती है। बेदाम, दुस्साहसी बन कर आज़ादी चाहती है। फिर तुम उसका हाथ थाम लेते हो। लम्बा सा सुफियाना कलाम सुनाकर, … Continue reading वो, तुम्हारे भीतर वाली दुनिया