Category: हिंदी

बड़े शहरों में मेरा मन नही लगता

बड़े शहरों की ऊँची इमारतों मेंमेरा मन नही लगतायहाँ जगमगाते बल्बदफ़्न करते हैं पहाड़ों की धामचटकनियों के सहारेखिड़की और दरवाज़ेसलामत रखते हैंबहुतायत, दिखावा और मायूसीठंडी बयारें पंखे का टेक लगाएदबे पाँव ही आती हैंबाग़ी हवाओं को यहाँआशियाँ नही मिलताबड़े शहरों की ऊँची इमारतों मेंमेरा… Continue Reading “बड़े शहरों में मेरा मन नही लगता”

अतरंगी प्रेम कहानी – तुम तक

साधारण सी लगने वाली प्रेम कहानियाँ क्या ख़ास होती हैं ? मुझे याद है किशोरावस्था के वो दिन | ’९० के दशक की बात है |वो प्रेम कहानियों का दौर था ─ चाहे फिल्में हो या किताबें | या फिर शायद ऐसा तो नहीं था,… Continue Reading “अतरंगी प्रेम कहानी – तुम तक”

शोर

अंग्रेज़ी में एक कहावत है, Grass is greener on the other side. दूर से जब हम क़ामयाबी और प्रशंसा को देखते हैं तो वो ताजमहल प्रतीत होती है। मगर पास आने पर वो कामयाबी सिर्फ एक खूबसूरत मक़बरा बन कर रह जाती है। उसका… Continue Reading “शोर”

आज लंबी कतारें हैं

आज सुबह tv पर न्यूज़ सुनी। कह रहे थे कि आजकल कॉफिन्स की बिक्री बढ़ गयी है। फिर कहा कि कुछ देश अभी भी अपनी सीमांतों को लेकर लड़ रहे हैं। कुछ राजनैतिक तंज कसे जा रहे थे। एक चक्रवर्ती तूफान की तबाही का… Continue Reading “आज लंबी कतारें हैं”

जो छूट गए…

जो छूट गए वो पल भर थे सागर नही बस लहर ही थे मंज़िल तो नही पथिक ही थे फिर क्षोभ है क्यों उनके जाने का क्रोध है क्यों संसार मे जिसने जन्म लिया पृथक ही उसने जीवन जिया आते जाते कुछ हाथ मिले… Continue Reading “जो छूट गए…”

यादों का स्वेटर

(आज मेरे बेटे का जन्मदिन है। चौदह साल यूँ गुज़र गए मानो छू मंतर हो गए! उसके बचपन को याद करते हुए कुछ पंक्तियाँ लिखी हैं) लम्हों के ऊनी धागों सेमैंने यादों का स्वेटर सजोया हैवक़्त तो बेज़ार हैदेखो तेज़ रफ़्तार हैस्वेटर अब वो… Continue Reading “यादों का स्वेटर”

मैं इश्क़ हूँ

सच मे,तुम्हारी कसम,चाँद को हथेली पर रख सकता हूँमैं इश्क़ हूँकुछ भी कर सकता हूँ!तारों की बारातसजा सकता हूँबिंदु से तरंगेउठा सकता हूँमन को आतुरकर उसकी थाह लेता हूँमैं इश्क़ हूँइन्द्रजालों में पनाह लेता हूँ।मैंने आसमान को लाल भी रंगा हैपंखों के बिनाउड़ने का… Continue Reading “मैं इश्क़ हूँ”

सपनों के शहर हम जाते नही

उड़ने का हौंसलाहम दिखाते नही,सपनों के शहरअब हम जाते नही। बहती हवाक्यों पेड़ों की शाखाओंसे उलझ गई,पानी की लहर देखोउफ़ान से पहलेही सिमट गई,उड़ती पतंग भीअपनी डोर से आके लिपट गई। पिंजरों से हमेंशिकायत है बड़ीफिर भी उड़ने का हौंसलाहम दिखाते नही,सपनों के शहरअब… Continue Reading “सपनों के शहर हम जाते नही”

तो क्या मिल जाते हैं चुप रहने वाली औरतों को सौ सुख?

कहते हैं वो घर सुखी होते हैंजहां औरतें कम बोलती हैं,उनकी चुप्पी की बुनियादपर खड़े होते हैंखुशियों के शीश महल, भर जाती हैं उनकी झोलियाँहज़ारों सुखों से।एक चुप परवो कहते हैं नासौ सुख वारते हैं…और ताउम्र की चुप्पी पर? गुज़र जाती हैउनकी ज़िंदगीसिर्फ एक… Continue Reading “तो क्या मिल जाते हैं चुप रहने वाली औरतों को सौ सुख?”

पतंगों की जंग

अब शीत लहर घबराई सी ढूंढे नए छोर, सूरज की किरणों को देखो खींचो पतंग की डोर ! आसमान में रंग हैं बिखरे, बिखरे चहुँ ओर मुंडेरों के पीछे से सब मचा रहे हैं शोर! छतों के ऊपर देखो कैसा मेला लगा है यार… Continue Reading “पतंगों की जंग”

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