Failure: The ‘Bitter-Half’ of Success

I saw a video some time back, that interestingly, traced the evolution of how failure has been viewed in history, over years and over continents. The video helped to shape this article, in which I clearly question the desperate need for success. That Incy Wincy spider may have found the need to climb the wall … Continue reading Failure: The ‘Bitter-Half’ of Success

बदलाव

इस नए साल के आगमन पर मैंने ज़्यादा संदेश नहीं भेजे। न ही ज्यादा लोगों को फोन किया । दरअसल यह नया साल मेरे जीवन में भी काफी कुछ नया लेकर आया तो उसी उधेड़ बुन में व्यस्त थी। कुछ अजीबोग़रीब सी स्थिति लग रही थी । यहाँ एक पूरा वर्ष पलट रहा था । … Continue reading बदलाव

मुझे भ्रम है

यूँ ही एक भ्रम सा पाल रखा है कि जो प्रत्यक्ष है वही सत्य है और स्थायी भी । हिमालय की ऊँचाईयों पर बसने वाले जीव शायद ही घाटियों की खोज खबर रखते हैं। और कहीं पहुँचने की जल्दी में भागती हुई नदी क्या जाने कि पर्वत की भाँति अचल रहना भी कुछ होता है। … Continue reading मुझे भ्रम है

Positive and Negative Reinforcement: A Reflection of how Children View Themselves

Seven-year-old Shreya was having a casual conversation with her mother. As she expressed her views, she was met with a very laid-back remark by her father, “Oh! Are you that dumb Shreya?” He did not expect to hear what he did! “Yes Dad, I am. Specially at Mathematics.” Shreya’s parents were taken by surprise by … Continue reading Positive and Negative Reinforcement: A Reflection of how Children View Themselves

छोटे शहरों को समर्पित

छोटे शहर थोड़ा धीरे चलते हैं । शायद उनकी घड़ियों की धड़कने तेज़ नहीं होतीं । धूप सुस्ताते हुए बरामदों में झाँकती है। और सुबह-सुबह सड़कें कुछ चंद ही कदम चलती हैं । धीमे-धीमे सूरज चढ़ता है तो काफिला आगे बढ़ता है । मंज़िलें पास ही होती हैं। फिर भी उन्हें तय करने में घण्टों … Continue reading छोटे शहरों को समर्पित