अतरंगी प्रेम कहानी – तुम तक

साधारण सी लगने वाली प्रेम कहानियाँ क्या ख़ास होती हैं ? मुझे याद है किशोरावस्था के वो दिन | ’९० के दशक की बात है |वो प्रेम कहानियों का दौर था ─ चाहे फिल्में हो या किताबें | या फिर शायद ऐसा तो नहीं था, कि हमें ही और कोई कहानी नज़र नहीं आती थी!

यूँ तो सच कहें, तो  हर प्रेम कहानी एक सी होती थी | आपको किसी भी गली-नुक्कड़ पर मिल सकती थी | बिलकुल आम, तू-तू, मैं-मैं से शुरू होती हुई, लुक्का-छुप्पी में पलती बढती और असीम किस्से बुनती हुई | फिर भी हर कहानी की अपनी एक अलग आत्मा थी | कुछ ख़ास था हर साधारण सी कहानी में | और जब सुनने बैठो तो लगता था, अरे ! यह तो मेरी कहानी जैसी ही है!

सच पूछिए तो प्यार का स्वरुप है ही ऐसा| अनजान और फिर भी जाना पहचाना | यूँ तो प्यार हमेशा, हर उम्र में और हर बार नायाब होता है, लेकिन वो बीसवां दशा भुलाते नहीं भूलता | मेरी एक मित्र थी जिसने उन्नीसवें साल में आते ही कहना शुरू कर दिया था, ” बस अब हम सब अपनी ज़िन्दगी के सबसे महत्वपूर्ण दशक में कदम रखने वाले हैं | इसी दशक में हम पढाई के अंतिम चरण से गुजरेंगे, नौकरी लगेगी और प्यार भी हमारा इसी दशक में परवान चढ़ेगा |” मुझे उसकी बातों पर बहुत हंसी आती थी | लेकिन सच ही तो कहती थी वो | वो बीसवां दशा अतरंगी था | और उसका सबसे खूबसूरत रंग प्रेम का लाल था |

समय के साथ प्यार ने अपनी परिभाषा और पहनावा दोनों ही बदल लिए | इसका तात्पर्य यह नहीं है कि वो प्यार नहीं रहा | मगर सच यह है कि हम जानी – पहचानी गलियों से बार-बार गुज़रने की गलती दोहराने में हिचकिचाते कम हैं | मैं अब भी रोमांस पढ़ना और देखना पसंद करती हूँ, मगर आजकल के इन किस्सों में अपनी कहानी की झलक बस ढूंढती रह जाती हूँ |

ऐसे में मैंने हेमा बिष्ट की किताब ‘ तुम तक’ जो हाल ही में अमेज़न पर रिलीज़ हुई पढ़ी | प्यार की वो आम कहानी जो ख़ास है | शुक्रिया हेमा का मुझे मेरा बीसवां दशा याद दिलाने के लिए | यह कहानी पढ़ना जैसे प्यार की पुरानी गलियों से गुज़ारना |

‘ तुम तक’ का लिंक यहाँ शेयर कर रही हूँ | उस ओर मुख करें और इस भागती दौड़ती ज़िन्दगी में चुरा लें प्यार के कुछ बेहद अनमोल पल |

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13 thoughts on “अतरंगी प्रेम कहानी – तुम तक”

  1. Hi,
    I believe that the Creative Spirit looks for people who are open and ready to be poured into. I don’t believe that what I have as a writer is something that I developed. It goes much deeper and beyond what I could ever imagine. Every now and then I am given the privilege to write a poem. Sometimes it is a literary article or a Fable, and most of the time it comes in the form of a novel. I believe it is the openness within the person that allows the Creative Spirit to move within them, and evidently that is what moves you too.
    Take care.
    Shalom aleichem,
    Pat G @ EverythingMustChange

  2. Hindi writing is such a rarity and your blog is on top of the list for me. It has been a while since I picked a book in Hindi. I will be checking this one out for sure.

  3. So true Sonia–finding ones own story in ‘other’ love stories was such a thrill–you know when one wondered–“how did this writer/director know what I was feeling?” And yes, that feeling is not easy to come by these days–but when it does, it’s special.
    I’m still bound to paper versions of books but look forward to reading this one when I come by it.
    I like your friend’s ’20 ke dashak ka synopsis’ 😊

  4. बहुत शुकराना मेरी दोस्त ❤️ कहानी की डोर थामे बीते वक़्त की पतंगबाज़ी का नज़ारा देखना तुम्हारे लिये सुखद रहा, यह जानकर मुदित हो रही हूँ। तुम्हारे सहयोग, तुम्हारे शब्दों और इन प्यारे भावों के लिये आभारी हूँ। 🙏

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